"मंगल भवन अमंगल हारी | उमा सहित जेहि जपत पुरारी ||"
श्री तुलसीदास कृत रामचरितमानस की ऐसी चौपाइयाँ रामायण पढ़ने व समझने को अत्यंत सरल व सरस बना देती हैं | क्या ऐसा आनंद श्रीमद भगवद गीता को पढ़ने में भी मिल सकता है? जी हाँ ! श्री कृष्ण की कृपा से इस वेबसाइट के माध्यम से हमने यही प्रयास किया है | आशा है पाठकों को इसका लाभ मिलेगा |